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पाप कैसे क्षमा होंगे

पापो की क्षमा

विषय:- परमेश्वर का सिंघासन सदा सर्वदा बना रहेगा।

भजन संहिता 45:6-7 हे परमेश्वर, तेरा सिंहासन सदा सर्वदा बना रहेगा; तेरा राजदण्ड न्याय का है।  तू ने धर्म से प्रीति और दुष्टता से बैर रखा है। इस कारण परमेश्वर ने हां तेरे परमेश्वर ने तुझ को तेरे साथियों से अधिक हर्ष के तेल से अभिषेक किया है।  ये पद यीशु मसीह में पूर्ण होते हैं। इब्रानियो का लेखक इन पदों का प्रयोग, उठाने, महत्व, अधिकार व मसीह के चरित्र पर लागू करता हैं। इब्रानियो 1:8 मसीह का राज्य सदा सर्वदा का होगा। प्रकाशितवाक्य 1:6 यह भजन मसीह की महत्वपूर्ण विशेषता प्रेम और घृणा से सम्बंधित हैं। वह धर्मी से प्रेम करता हैं क्योंकि उसका आनन्द पिता की इच्छा को पूरा करने में हैं। वह धार्मिकता से प्रेम करता हैं। उतना ही अधर्म से घृणा करता हैं। यह उसने क्रूस पर प्राण देकर तथा अधर्म को कुचलकर तथा अपने लोगो को पापों से बचा कर सिद्ध कर दिया। मत्ती 1:21 जब वह पृथ्वी पर था तो उसने हर प्रकार की बातों का सामना किया। क्योंकि यीशु ने धार्मिकता से प्रेम किया तथा दुष्टता से घृणा। हम मसीह लोगो को हमेशा ध्यान रखना है कि हम धार्मिकता से प्रेम रखे। तथा उन बातों से दूर रहना है जो बुरी हैं और बुराई ...

विषय:- सहभागिता

मसीहियों की एक साथ सहभागिता काफी महत्वपूर्ण हैं क्योंकि यह हमारी एक साथ एकता हैं। और एकता होने के कारण विश्वासी मसीह में उत्साहित किया जाता हैं और बढ़ता है। रोमियों 1:11-12 संसार यह जानने पाता हैं कि यीशु परमेश्वर द्वारा भेजा गया। यूहन्ना 17:22-23 सहभागिता की शर्ते:- ◆ एक दूसरे के प्रति मूलभूत समर्पण। रोमियों 12:10 ◆ हमारा समर्पण निस्वार्थ प्रेम पर आधारित होना चाहिए। यूहन्ना 13:34 ◆ सच्ची सहभागिता का केंद्र मसीह हैं। 1 यूहन्ना 1:3 ◆  ज्योति में चलना। यानी दुसरो के सामने अपने पापों को मान लेना या प्रेम में होकर दूसरो के पापों को ढाप देना। मत्ती 18:15 ◆ किसी भी प्रकार के मुखोटे को हटाना। 1 पतरस 1:22 ◆ दूसरों की भलाई के लिए निष्कपट चिंता। फिलिपियो 2;2-3 ◆ अपना जीवन अर्पित कर देने के लिए उत्सुकता। यूहन्ना 15:12-13 जब हम कलीसिया में सहभागी होंगे तो इस सहभागिता के कारण हमारे जीवन मे आशीषों का आना तय हैं।  ★हमारे जीवन मे परमेश्वर का भय पाया जाएगा। जिसके कारण अदभुत कार्य हमारे बीच में होंगे। प्रेरितों 2:42 ★ हमारे जीवन में आनन्द पाया जाएगा। प्रेरितों 2:46 ★ सब लोग सहभागी लोगो से प्रसन्...

विषय: यदि पछताए तो उसे क्षमा कर।

लूका 17:3 सचेत रहो; यदि तेरा भाई अपराध करे तो उसे समझा, और यदि पछताए तो उसे क्षमा कर।  यीशु मसीह ने अपने शिष्यों को सिखाया की वह अपने पड़ोसी से अपने समान प्रेम करें। और इस प्रेम का एक भाग क्षमा करना है। जब तक हम क्षमा करना नही सीख जाते तब तक हम अपने पड़ोसी से अपने समान प्रेम नही रख सकते। यीशु चाहते हैं हम क्षमा करने का स्वभाव अपनाए और उनकी सहायता करें जो हमें ठोकर खिलाते हैं हम उनसे बदले की भावना या घृणा न रखें। क्षमा या मेल मिलाप सच्चे रूप से तब तक नही हो सकता जब तक ठोकर दिलाने वाला व्यक्ति अपना पाप या गलत कार्य को स्वीकार न कर ले। और सच्चे रूप से न पछताए। और वह अपनी गलती को बार बार न दुहराए। हमें चाहिए कि हम क्षमा दान  देने के लिए इच्छुक रहें यदि ठोकर दिलाने वाला सच्चे रूप से पछताए। यीशु मसीह का यह कथन की एक दिन में सात बार का अर्थ यह नही की आदतन हम पाप को अनदेखा कर दे। और इसका अर्थ यह भी नही की विश्वासी अपने ऊपर होने वाले बुरे बर्ताव और अनुचित व्यवहार को सदा तक सहते रहें। परन्तु इससे वह यह शिक्षा देते हैं कि हमें लगातार ठोकर खिलाने वाले को क्षमा और मदद करने का स्वभाव बनाये रख...

विषय:- आराधना।

नहेम्याह 8:5-6 5 तब एज्रा ने जो सब लोगों से ऊंचे पर था, सभों के देखते उस पुस्तक को खोल दिया; और जब उसने उसको खोला, तब सब लोग उठ खड़े हुए। तब एज्रा ने महान परमेश्वर यहोवा को धन्य कहा; और सब लोगों ने अपने अपने हाथ उठा कर आमीन आमीन कहा; और सिर झुका कर अपना अपना माथा भूमि पर टेक कर यहोवा को दण्डवत किया।  हम सभी परमेश्वर की आराधना करते हैं। इसमे वे कार्य व व्यवहार होते हैं जो स्वर्ग व पृथ्वी के महान परमेश्वर को आदर और सम्मान देते हैं। इसलिए आराधना परमेश्वर पर केंद्रित होती हैं न कि मानव केंद्रित। मसीह आराधना में हम कृतज्ञता के साथ परमेश्वर के निकट आते हैं कि उसने मसीह के द्वारा हमारे लिए जो किया और साथ ही पवित्रता के द्वारा भी। इसमें विश्वास की वचन बद्धता और यह स्वीकारना होता हैं कि वह हमारा प्रभु हैं। जब सच्ची आराधना होती हैं तो परमेश्वर के पास लोगों के लिए बहुत आशीषें होती हैं। वह प्रतिज्ञा करता हैं कि ◆वह उनके साथ होगा। मत्ती 18:20 ◆ अपनी महिमा से अपने लोगो पर छाया करेगा। 1 पतरस 4:14 ◆ वह अपने लोगो पर आशीषों की वर्षा करेगा। विशेषकर शांति से। भजन संहिता 29:11 ◆ अधिकाई से आनन्द प्रदान ...

विषय:- पवित्रता के खोजी।

इब्रानियों 12:14 सब से मेल मिलाप रखने, और उस पवित्रता के खोजी हो जिस के बिना कोई प्रभु को कदापि न देखेगा।  वचन कहता हैं कि सब से मेल मिलाप रखे। ऐसा इसलिए कहा गया हैं क्योंकि इसके बिना हम प्रभु को नही देख सकते। साथ ही वचन कहता हैं कि हम पवित्रता के खोजी बनें।  पवित्र होने का अर्थ है कि परमेश्वर के लिए पाप से अलग होना, यह परमेश्वर के निकट होना होता हैं। उसके समान होना, और उसकी उपस्थिति धार्मिकता व संगति को सम्पूर्ण ह्रदय से ढूढ़ना हैं। हम जितना परमेश्वर के समीप होंगे उतना ही पाप से दूर होंगे।  ◆ पवित्रता अपने लोगों के लिए परमेश्वर का उद्देश्य था जब उसने मसीह से उद्धार की योजना बनाई। इफिसियों 1:4   ◆ पवित्रता मसीह के अपने लोगों के लिए लक्ष्य था जब वह इस संसार में आया। 1 कुरन्थियो 1:2 ◆ पवित्रता मसीह का अपने लोगों के लिए लक्ष्य था जब उसने उनके लिए स्वयं को क्रूस पर दे दिया। इफिसियों 5:25-27 ◆ पवित्रता से परमेश्वर का उद्देश्य हैं कि हमें एक नई सृष्टि बनाये तथा पवित्र आत्मा दे। इफिसियों 2:10 ◆ पवित्रता के बिना कोई भी परमेश्वर के योग्य नही हैं। 2 तीमुथियुस 2:20-21 ◆ पवित्रता...