विषय:- आराधना।
नहेम्याह 8:5-6 5 तब एज्रा ने जो सब लोगों से ऊंचे पर था, सभों के देखते उस पुस्तक को खोल दिया; और जब उसने उसको खोला, तब सब लोग उठ खड़े हुए। तब एज्रा ने महान परमेश्वर यहोवा को धन्य कहा; और सब लोगों ने अपने अपने हाथ उठा कर आमीन आमीन कहा; और सिर झुका कर अपना अपना माथा भूमि पर टेक कर यहोवा को दण्डवत किया। हम सभी परमेश्वर की आराधना करते हैं। इसमे वे कार्य व व्यवहार होते हैं जो स्वर्ग व पृथ्वी के महान परमेश्वर को आदर और सम्मान देते हैं। इसलिए आराधना परमेश्वर पर केंद्रित होती हैं न कि मानव केंद्रित। मसीह आराधना में हम कृतज्ञता के साथ परमेश्वर के निकट आते हैं कि उसने मसीह के द्वारा हमारे लिए जो किया और साथ ही पवित्रता के द्वारा भी। इसमें विश्वास की वचन बद्धता और यह स्वीकारना होता हैं कि वह हमारा प्रभु हैं। जब सच्ची आराधना होती हैं तो परमेश्वर के पास लोगों के लिए बहुत आशीषें होती हैं। वह प्रतिज्ञा करता हैं कि ◆वह उनके साथ होगा। मत्ती 18:20 ◆ अपनी महिमा से अपने लोगो पर छाया करेगा। 1 पतरस 4:14 ◆ वह अपने लोगो पर आशीषों की वर्षा करेगा। विशेषकर शांति से। भजन संहिता 29:11 ◆ अधिकाई से आनन्द प्रदान ...
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