विषय:- दीनता।
आज बहुत सारे लोगो की सोच बन गयी हैं कि हम दीन क्यो हो। इस कारण से आज संसार दीनता को महत्व नही देता हैं। लेकिन परमेश्वर आधारित मानवता और उद्धार की विचारधारा में दीनता को बहुत प्राथमिकता दी गयी हैं।
दीन होने का मतलब है कि हम अपने दुर्बलताओं के बारे में जाने और हमारी उपलब्धियों के लिए परमेश्वर को प्रशंसा दे। 【 यूहन्ना 3:27 】
हमें दीन इसलिए बनना है क्योंकि हम प्रभु के सिवाय और किसी पर घमण्ड नही कर सकते।【 2 कुरुन्थियो 10:17 】
हमारा मूल्य और फलवन्त होना प्रभु पर निर्भर हैं और परमेश्वर की सहायता के बिना हम कुछ भी नही कर सकते हैं।
परमेश्वर दीनता से चलने वालों के साथ रहता हैं परमेश्वर दीनो को अनुग्रह देता हैं पर अभिमानियों से विरोध करता हैं। 【 याकूब 4:6 】।
उसकी सन्तान प्रभु की सेवकाई दीनता से करते हैं।【 प्रेरितों 20:19 】
क्योकि हम विश्वासी हैं इसलिए हमें दूसरों के प्रति दीन होना चाहिए।
दीनता का विपरीत हैं घमण्ड, जो उस व्यक्ति में पाया जाता हैं जो अपनी खूबी, श्रेष्ठता और उपलब्धियों के कारण अपने आप में अहंकार और स्वाभिमान की भावना रखता हैं।
परमेश्वर आप सभी को आशीष करें।
सभी को जय मसीह की।
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Samanta AG Church
बलजीत नगर पटेल नगर
नई दिल्ली इंडिया।
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