विषय:- संसार के सदृश्य न बनो।

रोमियो 12:2
और इस संसार के सदृश न बनो; परन्तु तुम्हारी बुद्धि के नये हो जाने से तुम्हारा चाल-चलन भी बदलता जाए, जिस से तुम परमेश्वर की भली, और भावती, और सिद्ध इच्छा अनुभव से मालूम करते रहो॥ 

वचन बताता हैं कि जब हमने मसीह को ग्रहण किया तो हम नए हो गए इसलिए हम संसार के सदृश्य ना बने यानी हमारे कार्य संसार के लोगो की तरह न हो। जब  हम परमेश्वर के भय और उसकी बुद्धि में चल रहे हैं तो अपने चालचलन पर भी ध्यान दे।

हमे यह पता होना चाहिए कि संसार की वर्तमान स्थिति कैसी हैं। लोग एक दूसरे को नुकसान पहुँचाना चाहते हैं एक दूसरे के अंदर कमी निकालते रहते हैं और दूसरे लोगो के लिए अच्छा सोचते ही नही है। हर एक व्यक्ति ऐसा हो गया हैं कि उसपे कोई प्रतिबन्ध ही नही है। 

हमें इस संसार की आत्मा जो अनन्त सच्चाई और परमेश्वर के वचन की धार्मिकता के स्थान पर अन्य कामो पर प्रबल और प्रचलित हैं उसके विरुद्ध खड़ा होना है। ( 1 कुरुन्थियो 1:17-24)

हमें दुष्टता से घृणा करनी चाहिए, धार्मिकता से प्रेम करना चाहिए। और उन सब सांसारिक बुरी वस्तुओं को नकारना चाहिए जो हमारे चारों ओर हैं जैसे लालच, स्वार्थ, शत्रुता, घृणा, बदला, अपवित्रता, अपशब्द, अनैतिकता, मतवालापन, नशा आदि।

हमें परमेश्वर की इच्छा के अनुसार सोचना चाहिए उसके वचन को पढ़ना चाहिए। हमारी योजना और लक्ष्य परमेश्वर के वचन के अनुसार होनी चाहिए।

परमेश्वर आप सभी को आशीष करे।
सभी को जय मसीह की।

Samanta AG Church
बलजीत नगर पटेल नगर
नई दिल्ली इंडिया।

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