विषय:- यीशु की परीक्षा।

यीशु मसीह ने बपतिस्मा लिया उसके बाद यीशु मसीह 40 दिन उपवास में रहे। और उसके बाद शैतान ने यीशु की परीक्षा ली।

शैतान द्वारा यीशु की परीक्षा यीशु को आज्ञाकारिता और परमेश्वर की इच्छा के पथ से हटाना था। हम जब मत्ती की पुस्तक 4 अध्याय 1 से 10 वचन को पढ़ते हैं तो उसमें पाएंगे कि हर परीक्षा में यीशु ने अपने आप परमेश्वर के वचन के अधीन रखा न कि शैतान की इच्छा के साथ 【 मत्ती 4:4,7,10 】

यीशु मसीह की परीक्षा से हम क्या सीख सकते हैं?

★शैतान हमारा सबसे बड़ा शत्रु हैं। मसीह होने के नाते हमे सावधान रहना है क्योंकि हम एक आत्मिक युद्ध में हैं, अनदेखी लेकिन शैतानी शक्तियों के साथ।
इफिसियों 6:12

★ पवित्र आत्मा के बिना तथा परमेश्वर के वचन के उचित प्रयोग बिना, मसीही लोग पाप व परीक्षा पर जय नही पा सकते।

★यीशु मसीह की परीक्षा से हम सीख सकते हैं कि हमें वचन का ज्ञान होना चाहिए और इसके लिए रोज नियमित रूप से बाइबल पढ़ना चाहिए। 

★ यह पद उन लोगो के लिए भी हैं जो सेवकाई करना चाहते हैं अगर आप सेवा में आना चाहते हैं प्रभु का कार्य करना चाहते हैं तो आपको उपवास के साथ आरम्भ करना चाहिए। यीशु मसीह ने अपनी सेवकाई से पहले उपवास रखा।

परमेश्वर आप सभी को आशीष करें।
सभी को जय मसीह की।

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Samanta AG Church
बलजीत नगर पटेल नगर
नई दिल्ली इंडिया।

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