विषय:- शरीर का दिया।

लूका 11:34
तेरे शरीर का दीया तेरी आंख है, इसलिये जब तेरी आंख निर्मल है, तो तेरा सारा शरीर भी उजियाला है; परन्तु जब वह बुरी है, तो तेरा शरीर भी अन्धेरा है। 

आँख शरीर के लिए प्रकाश प्राप्त करने का साधन हैं। यदि आँख स्वस्थ्य हैं तो वह प्रकाश को पूरी तरह प्राप्त कर सकती हैं व उपयोग कर सकता है। यदि आँख दोषपूर्ण हैं तो अंधकार प्रबल रहेगा और वह कार्य करने या चलने के लिए देख नही सकता।

इसी तरह , जब मनुष्य की आत्मिक आँखे, यानी जब उनकी इच्छाएँ, उद्देश्य और व्यवहार परमेश्वर की इच्छा के अनुसार हो ,तो उसके वचन का प्रकाश उनके ह्रदय में प्रवेश करता हैं जो उद्धार, फल और आशीषों को लाती हैं। 【 गलातियो 5:22 】
परन्तु यदि उनकी इच्छाएँ परमेश्वर की बातों पर केंद्रित नही हैं तो परमेश्वर की सच्चाई और प्रकाशन का कोई प्रभाव नहीं होगा।

हमें अपने जीवन को जाँचना चाहिए यह निश्चय करने के लिए कि हमारी आत्मिक आँखे इस प्रकार की हैं कि सुसमाचार हमें सच में शुद्ध कर सकता हैं और हमारे आंतरिक जीवन को नया कर सकता हैं।

परमेश्वर आप सभी को आशीष करें।
सभी को जय मसीह को।

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Samanta AG Church
बलजीत नगर पटेल नगर
नई दिल्ली इंडिया।

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