विषय:- अविश्वास का उपाय।
मरकुस 9:23-24
यीशु ने उस से कहा; यदि तू कर सकता है; यह क्या बात है
विश्वास करने वाले के लिये सब कुछ हो सकता है।
बालक के पिता ने तुरन्त गिड़िगड़ाकर कहा; हे प्रभु, मैं विश्वास करता हूं,
मेरे अविश्वास का उपाय कर।
हम जब प्रार्थना करते हैं तो बहुत सारे विषय को परमेश्वर के सामने रखते हैं और हम परमेश्वर से कहते हैं कि तेरा वचन कहता हैं कि सब कुछ सम्भव हैं विश्वास करने वालो के लिए।
हमें ध्यान देने की जरूरत हैं कि सब कुछ मतलब वो नही हैं जो कि हम सोचते हैं। हम सब कुछ का मतलब निकालते हैं कि सारी बाते जो भी हम सोचते हैं वह सब हो जाए। अगर हमारे सोचने के अनुसार सब कुछ हो गया तो शायद हमारे लिए तो वो अच्छा हो पर बहुतो के लिए वही बातें बुरी हो सकती हैं और शायद खुद हमारे लिए भी वह बातें हानि की हो।
इसलिए विश्वास की प्रार्थना परमेश्वर की इच्छा पर आधारित होनी चाहिए। ऐसा करने से हम मुश्किलों में पड़ने से बच सकते हैं। क्योकि जब हमारी प्रार्थना उसकी इच्छा के अनुसार होगी तो व्यर्थ और मूर्खतापूर्ण और गलत मांग को हम नही करेंगे।
पद 24 में लिखा है मेरे अविश्वास का उपाय कर। जब हम बहुत सारी मांगे परमेश्वर के सामने रखते हैं और वे पूरी नही होती हैं तो हम कुड़कुड़ाते हैं कि परमेश्वर ने हमारी प्रार्थना नही सुनी। लेकिन हमें इस विषय के लिए परमेश्वर को बोलना चाहिए कि हमारे अविश्वास का उपाय कर।
परमेश्वर आप सभी को आशीष करें।
सभी को जय मसीह की।
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बलजीत नगर पटेल नगर
नई दिल्ली इंडिया।
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