विषय:-क्या हम हमेशा पाप करते रहें ?

रोमियो 6:1-2
सो हम क्या कहें? क्या हम पाप करते रहें, कि अनुग्रह बहुत हो? 
कदापि नहीं, हम जब पाप के लिये मर गए तो फिर आगे को उस में क्योंकर जीवन बिताएं? 

अध्याय 6 में पौलुस इस बात को कहता हैं कि क्या विश्वासी निरन्तर पाप करते रहें। और परमेश्वर के अनुग्रह के कारण दण्ड से बचे रहे। पौलुस कहता है कि सच्चा विश्वासी वह हैं जो मसीह में होकर रहते हैं और मसीह में उनको बपतिस्मा मिला और वे अब पाप में नही जियेंगे।

अध्याय 6 पद 2 हमें बताता हैं कि हमें ऐसा नही करना है क्योंकि जब हमें नया जीवन मिला है और हम पाप में मर गए तो फिर हमें वैसा जीवन जीने की आवयश्कता नही हैं। जब हमने बपतिस्मा लिया तो पाप के जीवन से दूर प्रभु यीशु मसीह के साथ दूसरे जीवन में पहुँच चुके हैं।

एक सच्चा विश्वासी अपने को पाप से अलग कर लेता हैं और वह पाप में नही जीता। इसी के विपरीत अगर वह पाप में जीवन बिताता हैं तो वह सच्चा विश्वासी नही हैं।
1 यूहन्ना 3:4-10

इस पूरे अध्याय में पौलुस कहता है कि हम एक ही समय में पाप का और एक ही समय में मसीह के दास नही हो सकते। 

पौलुस दृढ़तापूर्वक उनको चेतावनी देता हैं जो सोचते हैं कि वे पाप कर सकते हैं क्योंकि उन पर परमेश्वर का अनुग्रह हैं। यदि विश्वासी अपने आप को पाप के लिए सोप देता हैं तो वह पाप का दास बन जाता है और इस स्थिति में वह परमेश्वर के अनुग्रह और तेज़ से दूर हो जाते हैं। वचन बताता है कि पाप का अंत मृत्यु हैं। 【 रोमियों 6:16 】

परमेश्वर आप सभी को आशीष करे।
सभी को जय मसीह की।

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