विषय:- यीशु का राज्य।

यूहन्ना 18:36
यीशु ने उत्तर दिया, कि मेरा राज्य इस जगत का नहीं, यदि मेरा राज्य इस जगत का होता, तो मेरे सेवक लड़ते, कि मैं यहूदियों के हाथ सौंपा न जाता: परन्तु अब मेरा राज्य यहां का नहीं। 

यीशु के राज्य और उसके उद्धारकारी उद्देश्य की सच्ची प्रकृति के सम्बंध में तीन बातें ध्यान के योग्य हैं।

1. यीशु का राज्य क्या नही हैं।
यीशु का राज्य इस संसार का राज्य नही हैं। यह इस संसार में उत्पन्न नहीं हुआ, और न ही इस संसार की व्यवस्था पर प्रबल होने की इच्छा रखता हैं। 

यीशु मसीह का राज्य कोई राजनैतिक राज्य नहीं हैं कि वह संचालित राज्य को स्थापित करके संसार पर अधिकार करें। यीशु कहते हैं कि यदि वह इस पृथ्वी पर कोई राजनैतिक राज्य को स्थापित करने आया होता तो मेरे दास लड़ते। 【 मत्ती 26:51-52 】

2. यीशु का राज्य क्या है।
यीशु का राज्य यानी परमेश्वर के राज्य में उसका शासन, प्रभुता,  सामर्थ्य और उन सब के जीवन में जिन्होंने उसको ग्रहण किया और उसके वचन को मानते हैं उनके जीवन में आत्मिक आशीषें पाई जाती हैं।

परमेश्वर का राज्य धार्मिकता, शांति और पवित्र आत्मा में आनन्द हैं। 【रोमियों 14:17】

3. यीशु का राज्य क्या होगा
भविष्य में यीशु का राज्य और शासन  स्वर्ग और पृथ्वी पर होगा। और वह समय न्याय का समय होगा। 【प्रकाशित वाक्य 20:15】

परमेश्वर आप सभी को आशीष करे।
सभी को जय मसीह की।

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बलजीत नगर पटेल नगर
नई दिल्ली इंडिया।

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