विषय:- अपनी दृष्टि में बुद्धिमान न बनना।
नीतिवचन 26:12
यदि तू ऐसा मनुष्य देखे जो अपनी दृष्टि में बुद्धिमान बनता हो, तो उस से अधिक आशा मूर्ख ही से है।
वचन बताता है कि जो मनुष्य ऐसा सोचता हैं कि वह बहुत बुद्धिमान हैं तो उससे बुद्धिमानी की आशा नही की जा सकती हैं।
कई बार लोग सोचते हैं कि मुझमें सब बातों की समझ हैं व हर विषय का ज्ञान है इसलिए अपने ज्ञान व समझ को दिखाने के लिए वे हर किसी के बीच मे बोल पड़ते हैं और इस वजह से उनके अपने विचारों के प्रति घमण्ड भरा आत्मविश्वास आ जाता हैं।
मेरे प्रियो ज्ञान, समझ, बुद्धि मनुष्य के सोच विचार के द्वारा नही , परन्तु जो कुछ परमेश्वर ने अपने सम्पूर्ण वचन में कहा और प्रकाशित किया है, उसे स्वीकार करने से आता हैं। उन वचनो पर चलने और उन को अपने जीवन मे लागू करने से आता हैं। 【 नीतिवचन 1:2-7 】
परमेश्वर ने हमें चुना ताकि हम उसकी महिमा करे। और उसके अनुसार चले।
नीतिवचन 3:7
अपनी दृष्टि में बुद्धिमान न होना; यहोवा का भय मानना, और बुराई से अलग रहना।
वचन कहता हैं कि हम अपनी दृष्टि में बुद्धिमान न हो और जब हम परमेश्वर के भय मे चलते हैं तो वह हमें अच्छी बुद्धि को देता हैं। साथ ही उसका वचन हमें सहायता देता हैं कि हम बुराई से दूर रहें।
परमेश्वर आप सभी को आशीष करे।
सभी को जय मसीह की।
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