विषय:- परेशानियों में भी परमेश्वर पर विश्वास होना।
भजन संहिता 88:1-2
हे मेरे उद्धारकर्ता परमेश्वर यहोवा, मैं दिन को और रात को तेरे आगे चिल्लाता आया हूं।
मेरी प्रार्थना तुझ तक पहुंचे, मेरे चिल्लाने की ओर कान लगा!
यह पद पढ़ने पर ऐसा लगता हैं कि यह बहुत ही दुखद भजन हैं। इन पदों में दाऊद परमेश्वर से विनती कर रहा हैं कि उसकी प्रार्थना परमेश्वर तक पहुँचे।
यह पूरा भजन जब हम पढ़ते हैं तो पाते हैं कि दाऊद महसूस करता है कि वह मृत्यु के निकट हैं और परमेश्वर ने उसे त्याग दिया है।( पद 14 )
दाऊद ने रात दिन परमेश्वर की दोहाई दी हैं। उसे उसका कोई उत्तर नही मिला। वह बहुत ही निराश हैं और उसे कम ही आशा हैं।
इन सब बातों के बाद भी वह परमेश्वर प्रार्थना कर रहा हैं। वह अपना विश्वास परमेश्वर पर से नही हटाता, वह अंगीकार करता हैं कि प्रभु अभी भी परमेश्वर हैं जो उसका उद्धार करता हैं। ( पद 1)
यह भजन हमें बताता हैं कि कभी कभी हमारे जीवन मे परेशानियाँ ज्यादा समय तक रहती हैं। उस समय हम प्रार्थना करते हैं और हमे हमारी प्रार्थना का कोई उत्तर नही मिलता। ऐसे समय मे हमे अंधेरा अनुभव होगा । हमे समस्याओं का कोई कारण नजर नही आता और परमेश्वर हमें बहुत दूर प्रतीत होता हैं।
ऐसे समय मे भी हमारा विश्वास परमेश्वर से हटना नही चाहिए। जैसे दाऊद को मालूम है कि मेरा उद्धारकर्ता मेरा परमेश्वर यहोवा हैं।
परमेश्वर आप सभी को आशीष करें।
सभी को जय मसीह की।
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Samanta AG Church
बलजीत नगर पटेल नगर
नई दिल्ली इंडिया।
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