विषय:- रुपये से प्रीति न रखना।
सभोपदेशक 5:10
जो रूपये से प्रीति रखता है वह रूपये से तृप्त न होगा; और न जो बहुत धन से प्रीति रखता है, लाभ से
हमारे जीवन में हम सभी चाहते हैं कि हमारे पास बहुत धन हो। हमारे जीवन मे किसी भी वस्तु की घटी न हो। हम अपनी जरूरत के लिए परिश्रम करते हैं।
यह वचन बताता हैं कि धन व भौतिक सुखों की बहुतायत जीवन को अर्थ प्रदान नही करते हैं
यानि अगर हम अपने जीवन को सही ढंग से जीना चाहते हैं या खुशी से जीना चाहते हैं तो हमारे जीवन मे एक लक्ष्य होना चाहिए। जब आपके जीवन मे एक लक्ष्य होगा तो वास्तव में आपके जीवन का कोई मतलब होगा। हम पैसे कमाने को या सुविधाएं इकठ्ठा करने को लक्ष्य नही कह सकते और इस कारण से वे सुविधाएं या पैसे आपको सच्ची खुशी नही दे सकते।
आमतौर पर ईमानदारी से कार्य करने वाला व्यक्ति एक दिन के अथक परिश्रम के बाद चैन की नींद सोता हैं, परन्तु धनी व्यक्ति किसी आपत्ति या अपनी स्वयं की ही गलती के कारण सब कुछ खो देने के भय से सो नही पाता। यह बहुत ही अजीब सी स्थिती हैं की जब हमारे पास ज्यादा धन संपत्ति होती हैं तो भी हमे डर लगा होता हैं कि कही ये चोरी ना हो जाये या खो न जाए।
परन्तु अगर कुछ भी ना खोया जाए तो भी मरने के बाद कुछ भी अपने साथ नही ले जा सकेंगे।
इसलिए हम सभी परमेश्वर को धन्यवाद देना की उसने हमारी जरूरतों को पूरा किया। और आगे भी वह हमारी जरूरत को पूरा करेंगे। और अगर आपके पास अधिक धन संपत्ति हैं तो उसे परमेश्वर के कार्य मे लगाइये ताकि जिन्हें जरूरत है उसके लिए पूर्ति की जा सके।
परमेश्वर आप सभी को आशीष करे।
सभी को जय मसीह की।
Samanta AG Church
बलजीत नगर पटेल नगर
नई दिल्ली इंडिया।
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