विषय :- परमेश्वर हमारे लिए भलाई को ही देता है।

रूत की पुस्तक पढ़ने पर हम जानते हैं कि जो परमेश्वर से प्रेम रखते हैं, उसका आदर करते हैं व परमेश्वर और उसके वचन में विश्वासयोग्य रहते हैं उन लोगों के जीवन मे परमेश्वर कार्य करता हैं। 

रूत 1:1,3,5
1 जिन दिनों में न्यायी लोग न्याय करते थे उन दिनों में देश में अकाल पड़ा, तब यहूदा के बेतलेहेम का एक पुरूष अपनी स्त्री और दोनों पुत्रों को संग ले कर मोआब के देश में परदेशी हो कर रहने के लिये चला।
3 और नाओमी का पति एलीमेलेक मर गया, और नाओमी और उसके दोनों पुत्र रह गए।
5 जब महलोन और किल्योन दोनों मर गए, तब नाआमी अपने दोनों पुत्रों और पति से रहित हो गई। 

◆नाओमी परमेश्वर की विश्वासयोग्य दासी थी फिर भी उसके जीवन मे बहुत परेशानियां आई। उसका पूरा परिवार आकाल की वजह से बेघर हो गए।【 पद 1】
◆उसका पति व उसके दोनों पुत्र मर गए।【 पद 3,5 】

नाओमी को ऐसा लगता है कि परमेश्वर उसके विरुद्ध हैं लेकिन जब हम रूत की पुस्तक को पढ़ते हैं तो हमे पता चलता है कि वह उसके विषय मे चिंतित हैं और आवयश्कता के समय दुसरो के द्वारा सहायता करता है।

हम भी नाओमी की तरह विश्वासी हैं फिर भी हमे परेशानियों का सामना करना पड़ रहा हैं तो इसका अर्थ यह नही की परमेश्वर ने हमे छोड़ दिया या दण्ड दे रहा है।

बाइबल हमे बताता है कि हर एक बुरी परिस्थिति में भी सब बातों में भलाई को उत्पन्न करता हैं। 【 रोमियो 8 :28】

रूत 1:16
16 रूत बोली, तू मुझ से यह बिनती न कर, कि मुझे त्याग वा छोड़कर लौट जा; क्योंकि जिधर तू जाए उधर मैं भी जाऊंगी; जहां तू टिके वहां मैं भी टिकूंगी; तेरे लोग मेरे लोग होंगे, और तेरा परमेश्वर मेरा परमेश्वर होगा;

नाओमी की दो बहु में से ओर्पा तो उसे छोड़ कर चली गयी लेकिन रूत नही गयी उसने कहा तेरा परमेश्वर मेरा परमेश्वर होगा। नाओमी के विश्वास के कारण ही रूत ने विश्वास किया।

और हम जब मत्ती की पुस्तक अध्याय 1 पढ़ेंगे तो उसमें यीशु की वंशावली दी गयी हैं जिसमे रूत और बोअज़ का नाम हैं।
नाओमी के जीवन मे जो दुख था उसके द्वारा परमेश्वर ने एक बहुत ही बडी बात को प्रकट की।

परमेश्वर आप सभी को आशीष करे।
सभी को जय मसीह की।

Samanta AG Church
बलजीत नगर पटेल नगर
नई दिल्ली इंडिया।

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