विषय:- आनन्द
फिलिप्पियों 1:4
और जब कभी तुम सब के लिये बिनती करता हूं, तो सदा आनन्द के साथ बिनती करता हूं।
आनन्द उद्धार का एक अभिन्न अंग हैं। जब हम पिता पुत्र और पवित्र आत्मा के साथ समय बिताते हैं तो ये उनके साथ सम्बन्ध के द्वारा मिलने वाली आशीष हैं।
जब हम प्रार्थना में समय बिताएंगे, जब हम आराधना मे समय बिताएंगे और जब हम प्रभु की संगति में समय बिताएंगे तो हमारे जीवन मे अपने आप आनन्द आ जायेगा। लेकिन अगर हम सोचे कि यह आनन्द अपने आप से आ जायेगा तो नही। इसके लिए हमे कार्य करना पड़ेगा।
गलातियो 5:22,23
पर आत्मा का फल प्रेम, आनन्द, मेल, धीरज, और कृपा, भलाई, विश्वास, नम्रता, और संयम हैं; ऐसे ऐसे कामों के विरोध में कोई भी व्यवस्था नहीं।
जब हम आत्मा के फल के बारे में पढ़ेंगे तो उसमें आनन्द भी है। जब तक हम उसके वचनों में बने नही है दुसरो की मदद नही कर रहे हैं, और सांसारिक बातो से मन नही फिरा रहे तब तक हम आनन्दित नही हो पाएंगे।
इसलिए सबसे पहले हम परमेश्वर के सम्मुख रहे और उसके वचन में बने रहे। दूसरे लोगो के लिए मदद करे। और हम अपने लिए तो प्रार्थना करते ही है पर हम दूसरे लोगो के लिए भी प्रार्थना करें और आनन्द के साथ करे।
ये आनन्द ऐसा आनन्द नही की हम दूसरों के दुख में खुश हैं बल्कि हम उसके लिए पूरे मन से प्रार्थना करे।
परमेश्वर आप सभी को आशीष करे।
सभी को जय मसीह की।
Samanta AG Church
बलजीत नगर पटेल नगर
नई दिल्ली इंडिया।
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