विषय:- दुख में प्रार्थना और आनन्द में स्तुति।
याकूब 5:13
यदि तुम में कोई दुखी हो तो वह प्रार्थना करे। यदि आनन्दित हैं तो स्तुति के भजन गाए।
वचन कहता हैं कि जब हमारे लिए दुख का समय हैं। जब हम गरीबी में जीवन बिता रहे हो, जब हम क्लेश सह रहे हो, जब हमे नही पता कि क्या करना है हमे मार्ग दर्शन की आवयश्कता हो, उस समय हम प्रभु से प्रार्थना करे। उसके वचन को पढ़े और प्रार्थना करे कि परमेश्वर आपसे बात करे आपको वो वचन दे जिसकी आपको जरूरत हो परमेश्वर आपको जो भी वचन दे उसके अनुसार कार्य करे उसकी बात को सुने। क्योकि वचन कहता हैं कि【 अपनी सारी चिंता उसी पर डाल दो क्योंकि उसको तुम्हारा ध्यान हैं】 #1पतरस 5:7
और जब हमारे लिए आनंद का समय है उस समय हम उसकी स्तुति करे उसकी आराधना करें।
#भजन संहिता 149:1,5 वचन कहता हैं कि
1 याह की स्तुति करो! यहोवा के लिये नया गीत गाओ, भक्तों की सभा में उसकी स्तुति गाओ!
5 भक्त लोग महिमा के कारण प्रफुल्लित हों; और अपने बिछौनों पर भी पड़े पड़े जयजयकार करें।
जब हम आनंदित हैं तो उसके लिए नये गीत गाने हैं और चाहे हम बिस्तर में हो फिर भी उसकी स्तुति करे।
कई बार ऐसा भी देखने को मिलता हैं कि जब हमारे लिए आनन्द का समय होता हैं तो उस समय कई लोग और बातो में समय बिताना शुरू कर देते हैं,
जैसे चर्च के समय मे घूमने चले गए,
किसी व्यक्ति के लिए फ़ोन की जरूरत थी परमेश्वर ने दिया अब उसी फ़ोन को संगति के बीच मे इस्तेमाल करेंगे।
और भी कई बातों को हम देखते हैं। अगर हम ऐसा करने में व्यस्त हैं तो रुक जाइये और परमेश्वर को पहला स्थान दीजिये वस्तुओ या किसी मनुष्य को पहला स्थान मत दो परमेश्वर की स्तुति कीजिये।
परमेश्वर आप सभी को आशीष करे।
सभी को जय मसीह की ।
Samanta AG Church
बलजीत नगर पटेल नगर
नई दिल्ली इंडिया।
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