विषय:- अपराध क्षमा किया जाना

भजन संहिता 32:1-2
क्या ही धन्य है वह जिसका अपराध क्षमा किया गया, और जिसका पाप ढ़ाँपा गया हो। 
क्या ही धन्य है वह मनुष्य जिसके अधर्म का यहोवा लेखा न ले, और जिसकी आत्मा में कपट न हो॥

हमसे जब कोई भूल हो जाती हैं तो हम मन ही मन परेशान होने लगते हैं।
सच में उन लोगो के लिए बहुत ही आनन्द की बात हैं जिनके सारे अपराध परमेश्वर ने क्षमा कर दिए हो ताकि उनके अपराध उनके मन पर भारी ना हो। और उनका विवेक परेशान ना हो।   और ये अपराध तभी क्षमा हो सकते हैं जब हम परमेश्वर के सम्मुख पाए जाते हैं।

भजनकार परमेश्वर की क्षमा को तीन प्रकार से वर्णन करता हैं
पहला वह पाप क्षमा करता हैं यानी माफ कर देता हैं।
दूसरा वह पाप को छुपा देता हैं यानी अपनी दृष्टि से हटा देता हैं
तीसरा वह पाप उसके विरुद्ध नही गिना जाता हैं ( पद 2)

दूसरा वचन साफ कहता हैं कि परमेश्वर सच्चे पश्चात्तापी को धर्मी गिनता हैं।

जब मैं ने अपना पाप तुझ पर प्रगट किया और अपना अधर्म न छिपाया, और कहा, मैं यहोवा के साम्हने अपने अपराधों को मान लूंगा; तब तू ने मेरे अधर्म और पाप को क्षमा कर दिया॥ 
भजन संहिता 32:5
अगर हम पद 5 को देखे तो उसमें लिखा है कि जब हम अपने अपराध को अपनी गलतियो को परमेश्वर से बताएंगे और मान भी लेंगे तो वह हमारे सारे अधर्म और पापों को क्षमा कर देगा।
इसलिए अगर आपसे कुछ भी भूल हुई हैं तो परेशान ना हो और परमेश्वर के समीप जाओ और सारी बातों के लिए क्षमा मांगो। और परमेश्वर आपको क्षमा करेगा।

परमेश्वर आप सभी को आशीष करे।
सभी को जय मसीह की।

Samanta AG Church
बलजीत नगर पटेल नगर 
नई दिल्ली इंडिया।

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