विषय:-परमेश्वर की सेवा करने का चुनाव।
यहोशू 24:15
और यदि यहोवा की सेवा करनी तुम्हें बुरी लगे, तो आज चुन लो कि तुम किस की सेवा करोगे, चाहे उन देवताओं की जिनकी सेवा तुम्हारे पुरखा महानद के उस पार करते थे, और चाहे एमोरियों के देवताओं की सेवा करो जिनके देश मे तुम रहते हो, परन्तु मैं तो अपने घराने समेत यहोवा ही की सेवा नित करूँगा।
यह वचन परमेश्वर ने यहोशू से कहा और यहोशू ने लोगो को।
जब हम 15 पद से पहले पढ़ेंगे तो उसमें परमेश्वर ने जो आश्चर्यकर्म किए वो सब लिखे हैं कि कैसे परमेश्वर ने अपने लोगो को आशीष दिया। उन्हें ऊँचे स्थान पर रखा। और उन्हें ऐसा देश दिया जिसमें उन्होंने कुछ मेहनत नही करी।
इसके बाद परमेश्वर ने कहा कि अब यहोवा का भय मानकर उसकी सेवा खराई और सच्चाई से करो।और जिन देवताओं की सेवा तुम्हारे पुरखा करते थे उन्हें दूर करके यहोवा की सेवा करो।
जब परमेश्वर की कही हुई बाते यहोशू ने बता दी तब यहोशू ने कहा कि अगर यहोवा कि सेवा करनी तुम्हे अच्छी नही लगती है तो तुम आज चुनाव करो कि किस की सेवा करोगे
और यहोशू ने कहा कि मैं अपने घराने समेत यहोवा ही कि सेवा करूँगा।
मेरे प्रियो आज भी यह सवाल हैं मसीह लोगो से की आप किस की सेवा करेंगे। यह चुनाव आपका अपना हैं व्यक्तिगत हैं। हर विश्वासी के पास लगातार यह स्थिति बनी रहती हैं कि वह चुनाव करे। मेने चुनाव किया अपने जीवन मे। और मैने मैने चुना की मै परमेश्वर की सेवा करू।
बाइबल में कई लोगो ने इस बात का अंगीकार किया
रूत ने कहा कि तेरा परमेश्वर मेरा परमेश्वर होगा।
रूत 1:16
याकूब ने अपने घराने को कहा कि पराये देवता को निकाल फेको
उत्पत्ति 35:2
दानिय्येल के साथी ने राजा के सामने अंगीकार किया।
दानिय्येल 3:18
अगर हमने अंगीकार नही किया तो आज समय हैं परमेश्वर से प्रार्थना करे और जैसे यहोशू ने कहा कि आप किस की सेवा करोगे तो आप बोलने पाए कि आप अपने घराने समेत यहोवा की ही सेवा करेंगे।
परमेश्वर आप सभी को आशीष करे।
सभी को जय मसीह की
Samanta AG Church
बलजीत नगर पटेल नगर
नई दिल्ली इंडिया।
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