विषय:- पक्षपात ना करना।
नीतिवचन19:4
धनी के तो बहुत मित्र हो जाते हैं, परन्तु कंगाल के मित्र उस से अलग हो जाते हैं।
यह नीतिवचन बताता हैं कि साधारण तौर पर परिस्तिथियाँ कैसी होती हैं। यह नही की कैसी होनी चाहिए। बहुत से धनी मित्र ऐसे आकर्षित होते हैं जैसे शहद की ओर मधुमक्खी। धनी व्यक्ति के पास बहुत से मित्र होते हैं। लेकिन जो व्यक्ति निर्धन हैं गरीब हैं उसके मित्र बहुत कम होते है, यहा तक कि जो होते हैं वह भी उस से अलग हो जाते हैं क्योकि वह किसी को आर्थिक व व्यक्तिगत लाभ नही पहुँचा सकता हैं
नया नियम इस विषय के बारे में बहुत ही साफ कहता हैं कि पक्षपात ना करना। आइये याकूब की पुस्तक मे से कुछ वचनों को देखते हैं।
याकूब 2:2-3
क्योंकि यदि एक पुरूष सोने के छल्ले और सुन्दर वस्त्र पहिने हुए तुम्हारी सभा में आए और एक कंगाल भी मैले कुचैले कपड़े पहिने हुए आए।और तुम उस सुन्दर वस्त्र वाले का मुंह देख कर कहो कि तू वहां अच्छी जगह बैठ; और उस कंगाल से कहो, कि तू यहां खड़ा रह, या मेरे पांव की पीढ़ी के पास बैठ।
इन वचनों में याकूब ने कहा कि हम पक्षपात करने वाले ना बने। पक्षपात का मतलब है कि धन,कपड़ो की चमक, समाज मे लोगो की स्थिति के कारण उन लोगो पर विशेष ध्यान देना।
पद 2 और 3 कहता हैं कि अगर तुम्हारे पास एक ऐसा व्यक्ति आये जो सोने को व अच्छे कपड़ो को पहिने हुए हो और एक कंगाल भी मैले से कपड़े पहने आये
सुंदर वस्त्रवाले को अच्छी जगह बिठाये और कंगाल को कहे तू खड़ा रह। तो क्या हम पक्षपाती नही।
याकूब 2:4
तो क्या तुम ने आपस में भेद भाव न किया और कुविचार से न्याय करने वाले न ठहरे?
अगर हम अमीर व गरीब देख कर लोगो से बात करते हैं तो हम भी पक्षपात करने वाले हैं। ऐसा करना गलत हैं क्योंकि
◆ परमेश्वर को यह भेदभाव पसंद नही वह उस रूप को नही देखता जो बाहर से दिखाई देता हैं वह मन को देखता हैं।【 1 शमूएल 16:7 】
परमेश्वर आप सभी को आशीष करे।
सभी को जय मसीह की।
Samanta AG Church
बलजीत नगर पटेल नगर
नई दिल्ली इंडिया
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