विषय:- एकांत में प्रार्थना।
मत्ती 14:23
वह लोगों को विदा करके, प्रार्थना करने को अलग पहाड़ पर चढ़ गया; और सांझ को वहां अकेला था।
यीशु मसीह ने अपनी सेवकाई के दौरान कई बार एकांत में प्रार्थना की। यीशु मसीह ने परमेश्वर के साथ समय बिताया।
मसिहत में अगर हम चाहते हैं कि हम बढ़े और उन्नति करना चाहते हैं तो इसके लिए यह जरूरी हैं की हम अकेले में प्रार्थना करे।
बिना प्रार्थनाओं के हम उन्नति नही कर सकते। अगर हम परमेश्वर के साथ अकेले में समय नही बिता रहे हैं हम एकांत में उस से प्रार्थना नही कर रहे हैं तो आज ही से शुरू कीजिए। आप देखने पाएंगे कि आपका जीवन बदल रहा हैं। आपकी सेवकाई ,आपका परिवार ,आपका बिज़नेस या आप जिस विषय मे भी चिंतित हैं परमेश्वर उन सब मे आपको निश्चिन्तता देगा।
जब हम परमेश्वर के साथ समय बिताएंगे तो हमे डरने की जरूरत नही है क्योकि परमेश्वर ने खुद ही कहा है कि मत डर में तेरे साथ हु समय बिताना परमेश्वर से बाते करना होता हैं जैसे मूसा ने की और बातें करना मतलब एक दूसरे की सुनना जब हम बोलेंगे तो परमेश्वर सुनेगा और जब परमेश्वर बोले तो हमे सुनना हैं।
◆जब परमेश्वर ने मूसा से बात की तो वह अकेला था।
◆जब हन्ना ने प्रार्थना की तो अकेले में की।
◆यीशु मसीह जब पानी पर चले तो उससे पहले प्रार्थना की।
◆जब यीशु मसीह ने बारह चेलो की नियुक्ति की उससे पहले उन्होंने पूरी रात अकेले में प्रार्थना की।
◆दानिय्येल ने अकेले में प्रार्थना की और उसके बाद वह सिंह की माँद में डाला गया और परमेश्वर ने उसे बचाया।
अगर हम आश्चर्यकर्म चाहते हैं अपने जीवन मे तो परमेश्वर के साथ समय बिताना शुरू करे।
परमेश्वर आप सभी को आशीष करे।
सभी को जय मसीह की।
Samanta AG Church
बलजीत नगर पटेल नगर
नई दिल्ली इंडिया।
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