विषय:- विश्वास के साथ कर्म।

याकूब 2:14
हे मेरे भाइयों, यदि कोई कहे कि मुझे विश्वास है पर वह कर्म न करता हो, तो उस से क्या लाभ? क्या ऐसा विश्वास कभी उसका उद्धार कर सकता है?

इन पदों में याकूब कलीसिया के उन लोगो के बारे में बात कर रहा है जो लोग कहते तो है कि उन्हें प्रभु यीशु मसीह पर विश्वास है। लेकिन परमेश्वर और उसके वचन के प्रति उनके जीवन में समर्पण का कोई भी चिन्ह नजर नही आता हैं। यह लोग कलीसिया आएंगे पर इनकी बाते वचन से नही होती हैं। यह लोग सांसारिक लोगों की तरह बात करते हैं।
जब हम प्रभु यीशु मसीह पर विश्वास करते हैं तो वह विश्वास जीवित विश्वास होता हैं। यह विश्वास केवल मसीह को एक उद्धारकर्ता मानने तक सीमित नहीं है बल्कि उसके वचन पर चलना, उसकी आज्ञाकारिता मे चलना है। जो व्यक्ति विश्वास करता है वह आज्ञाकारी होगा।

याकूब 2:17
वैसे ही विश्वास भी, यदि कर्म सहित न हो तो अपने स्वभाव में मरा हुआ है।
अगर हम प्रभु पर विश्वास करके प्रार्थना करते हैं कि वो हमारे लिए सारी बातों को ठीक करेगा और प्रार्थना के बाद हम सोचते हैं या बोलते हैं कि ऐसा होगा या नही तो आपका विश्वास मरा हुआ है।
इसलिए जब हम प्रार्थना करे तो विश्वास भी करे और अगर हम विश्वास करेंगे तो उसके अनुसार कार्य भी करेंगे।

परमेश्वर आप सभी को आशीष करे।
सभी को जय मसीह की।

Samanta AG Church
बलजीत नगर पटेल नगर
नई दिल्ली इंडिया।

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